आधुनिकता :एक अंतहीन अंत
'आधुनिक' शब्द अंग्रेजी के 'मॉडर्न' शब्द से बना है और इसी तर्ज पर 'आधुनिकता' शब्द का सृजन हुआ है |संक्षेप में कहें तो- अब का, शुरू का या इस समय का बोध ही 'आधुनिकता' है यह एक विशेष दृष्टिकोण का परिचायक है जो मध्य युग के विचार पद्धति से भिन्न एक नई जीवन दृष्टि का वाचक है|
अब प्रश्न यह उठता है कि आखिर आधुनिकता की शुरुआत कब और कैसे हुई और आधुनिकता से तात्पर्य किस अर्थ में आधुनिकीकरण से है?
उपर्युक्त प्रश्नों के उत्तर के लिए हमें इतिहास के पन्नों को पलट कर देखना होगा, जब हम इतिहास के पन्नों पर दृष्टिपात करते हैं तो देखते हैं कि कई अन्य अवधारणाओं की तरह कुछ विद्वानों ने भारतीय आधुनिकता को भी यूरोपीय आधुनिकता का पिछलग्गू बताया है |
अर्थात इन लोगों की माने तो भारतीय आधुनिकता का प्रादुर्भाव पूर्णतः यूरोपीय आधुनिकता के तर्ज पर हुआ है,वह वहीं से प्रेरित है| भारत की मिट्टी में उसका विकास नहीं हुआ है |वह तो यूरोपीय आधुनिकता की अनुकरण मात्र है|
लेकिन क्या वास्तविकता यही है?
बिल्कुल नहीं!
किसी विचार से प्रभावित होना और विचार ही बन जाना दो अलग-अलग बातें हैं |यह सच है कि यूरोपीय आधुनिकता की कुछ विशेषताएं भारतीय आधुनिकता में भी देखने को मिलती है लेकिन यूरोपीय आधुनिकता ही भारतीय आधुनिकता है यह कहना निरीह मूर्खता है |
आधुनिकता ऐतिहासिक विकास की प्रक्रिया है |यह प्रक्रिया सदैव गतिशील रहती है| इसलिए इसकी ठीक-ठीक शुरुआत कब और कहां से हुई, यह कह पाना मुश्किल है क्योंकि हर परवर्ती युग अपने पूर्ववर्ती युग से कई संदर्भों में आधुनिक होता हीं है |अर्थात यह एक सतत प्रवाहमान धारा है,जो काल सापेक्ष होते हुए भी कालजयी है |'आधुनिकता' का आंकलन किसी एक संदर्भ, विचार या विषय को मध्य नजर रख के नहीं किया जा सकता क्योंकि इसका फलक विस्तृत है और इसका युग विशाल|
भारतीय आधुनिकता का इतिहास काफी पुराना है |दरअसल वैदिक युग में ही आधुनिकता के दर्शन हमारे भारत में हो जाते हैं | गार्गी का याज्ञवालक्य जी के साथ शास्त्रार्थ इसी आधुनिकता का परिचायक है |पितृसत्तात्मक समाज में एक स्त्री का शास्त्रार्थ में एक पुरुष को पराजित करना आधुनिक सोच का ही मूर्त रूप था | बात यदि हम हिंदी साहित्य की करें तो देखते हैं कि भक्ति कालीन साहित्य कई अर्थों में आधुनिकता का प्रथम अनुगूंज प्रतीत होता है |क्योंकि इसमें कबीर का अक्खड़पन हैं,|जाति -पाति पर करारा प्रहार है, तुलसी का समन्वयवाद है,मीरा अर्थात एक स्त्री का स्वातांन्त्रय है.. जो दकियानूसी सोच से जकड़े तत्कालीन पितृसत्तात्मक समाज पर जोरदार तमाचा है|
और भी ना जाने कितनी ही विशेषताएं हैं| तभी तो रामविलास शर्मा जी ने भक्ति काल को नवजागरण का पहला सोपान माना है| किंतु खेद का विषय यह है कि यह अनुगूंज रीतिकाल में राज दरबारों और आश्रय दाताओं की प्रशंसा में कहीं खो गयीं | हां,रीतिकाल के अंत में भूषण आदि के साहित्य में यह पुनर्जीवित अवश्य हो उठी |
इसके बाद के साहित्य को देखें तो 'भारतेंदु युग' तो हिंदी साहित्य में आधुनिकता का पर्याय ही है| नवजागरण का आगमन भारतेंदु युग में हीं हुआ| इस संदर्भ में कृष्ण बिहारी मिश्र जी का निम्नांकित कथन दृष्टव्य है" आधुनिकता भारतीय नवजागरण की सबसे बड़ी उपलब्धि है|"
भारतेंदु बाबू हरिश्चंद्र आधुनिकता के अग्रदूत कहे गए उनसे आधुनिकता की इस धारा को नया संबल मिला और यह महावीर प्रसाद द्विवेदी,गुप्त,निराला,महादेवी वर्मा,प्रसाद, पंत,नागार्जुन से होते हुए अज्ञेय के साहित्य में अपने चरम रूप में उभर कर सामने आई |
यही आधुनिकता का असल स्वरूप था| स्पष्ट रूप से कंहे तो साहित्यिक दृष्टि से भारत में आधुनिकता के असल रूप का प्रवेश लगभग 1960 के दशक से ही माना जाना चाहिए| क्योंकि आधुनिकता अपने वास्तविक रूप में इसी दशक से प्रकट होना आरंभ करती है | यह अपने पूर्ववर्ती रूपों से किस तरह भिन्न होती है इसे हम निम्न बिंदुओं के अंतर्गत देख सकते हैं-
* इस समय मनुष्य विभिन्न स्तरों (सामाजिक राजनीतिक आर्थिक) पर परिवर्तित होने के लिए बाध्य हुआ किंतु मध्यकाल में नहीं|
* शिक्षा का परंपरागत ढांचा टूट गया, शिक्षा सर्वसुलभ हों गई,मध्यकाल में ऐसा नहीं था|
* यातायात के साधनों में भी परिवर्तन आधुनिकता के रूप परिवर्तन के बड़े कारक है|
* प्रेस का विकास,प्रचार प्रसार आधुनिक बोध को मध्यकालीन बोध से पूर्णता अलग करता है|
* अभिव्यक्ति की दृष्टि से भी मध्यकालीन बोध तथा आधुनिक बोध में विभिन्न अंतर सामने आते हैं|
* साहित्य की हम बात करें तो देखते हैं कि मध्यकाल में ईश्वर केंद्र में रहा लेकिन आधुनिक काल में मनुष्य|
जब हम आधुनिकता की बात करते हैं तो यह अपनी ढेर सारी विशेषताओं के साथ हमारे सम्मुख कई संदर्भों में उभर कर आती है इसे हम भिन्न-भिन्न विद्वानों के मतों द्वारा समझ सकतें हैं -
एम. रोज़र - "modernization is the process by which individuals change from traditional way of life to a more complex, technologically advanced and rapidly changing style of life".
एनसाइक्लोपीडिया- "आधुनिकता वह मनोवृति है जो परंपरागत (मूल्यों)को नूतन की तुलना में गौण सिद्ध करती है और प्रतिष्ठित प्रचलित मान्यताओं तथा अभिनव और नवीन प्रक्रिया की अपेक्षाओं में समन्वय स्थापित करती है|"
डॉ नगेंद्र-" आधुनिकता मध्ययुगीन जीवन दर्शन से भिन्न एक नया जीवन दर्शन और दृष्टिकोण है|"
दूधनाथ सिंह- " आधुनिकता युग संदर्भ की भावना नहीं है यह कथन स्पष्ट संकेत करता है कि आधुनिक होने का मतलब आज का, इस दशक का, शताब्दी का होना नहीं असल में आधुनिक होना शाश्वत होना है|"
इस तरह आधुनिकता हमें विभिन्न विद्वानों द्वारा विभिन्न रूप में परिभाषित नजर आती है वास्तव में देश, काल और परिस्थितियों से उदभूत होने के कारण इसके स्वरुप में भिन्नता परिलक्षित होती है |इसी कारण आधुनिकता की संकल्पना और स्वरूप दोनों ही,आज भी विवादास्पद है|
मूल रूप से कहे तो आधुनिकता की प्रक्रिया में युग चेतना,देश काल के साथ संबंध,परंपराओं का संशोधन,अंधविश्वास एवं रूढ़िवादिता का नाश,स्थान काल एवं स्थिति में सापेक्षता,सामाजिक राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय चेतना में भावुकता की अपेक्षा विवेकशील दृष्टि,तथा जीर्णता को त्याग कर परिवर्तन एवं नवीनता को स्वीकारने का आग्रह होता है|
संक्षिप्त में कहें तो अंधानुकरण या बेहयापन दर्शाना आधुनिकता नहीं है बल्कि हमारे सामाजिक विकास का दस्तावेज है|
निष्कर्ष रूप में हम डॉक्टर लक्ष्मीसागर वार्ष्णेय के शब्दों में कह सकते हैं कि -
" आधुनिकता का अर्थ शराब पीना,बियर पीना,विवाहित बीवियों को तलाक देना, यूरोप के होटलों,रेस्टोरेंट्स का उल्लेख करना,परमीसिव सोसाइटी का दम भरना आदि नहीं और न वह इतिहास एवं परंपरा से विछिन्न कोई क्रम ही है |सामाजिक साहित्य के संदर्भ में आधुनिकता और युगबोध का प्रश्न भी जुड़ा है|"
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