नोयम चोमस्की और भाषा का सिद्धांत

विचार विनिमय के साधन का नाम भाषा है |

अर्थात हम अपनी मन की भावनाओ को जिस माध्यम द्वारा मूर्त रूप देतें है, उसे भाषा कहते हैं |

भारत विविधताओं का देश है ;यंहा हर स्तर पर विविधता नज़र आती है.. भाषायी स्तर पर भी | हिंदी, कन्नर, गुजराती, मलयालम, बंगाली, अंग्रेजी, कन्नौजी, बुंदेली, हरियाणवी आदि ना जाने कितनी हीं भाषाएँ यंहा बोली और समझी जाती हैं |
अनेक भाषाओं की इस मकड़ जाल में हम
हिंदी भाषा की बात करें उससे पहले हमें भाषा के स्वरुप को समझना होगा|
 आजतक भाषा  को ले कर अनेक सिद्धांत बने.. उसकी रचना- संरचना, रूपगत भेद, उत्पति, व्यापकता, प्रकार आदि की विस्तृत चर्चा भिन्न भिन्न भाषा शास्त्रीयों ने की | किसी ने उसकी उत्पति पर प्रकाश डाला तो किसी ने शब्दगत अर्थ को उजागर करके रख दिया | किसी ने भाषायी समस्याओं की चर्चा की तो किसी ने भाषा को व्यवहारिकता का पर्याय बता दिया... कहने का आशय यह है कि भिन्न - भिन्न लोगो ने भिन्न - भिन्न सिद्धांत दियें किन्तु, किसी ने भी भाषा के आनुवंशिक विकास की चर्चा नहीं की |
इस क्षेत्र में  अमेरिका निवासी नोयम चोमस्की का नाम प्रमुख है जिन्होंने  भाषा के आनुवांशिकी को स्पष्ट करतें हुएँ   inborn theory  अर्थात  भाषा विकास के सिद्धांत  का प्रतिपादन किया |
इन्होंने अपने सिद्धांत में भाषा को लेकर जो बातें कहीं वों निम्नलिखित है -

1. बच्चे में भाषा सिखने की क्षमता जन्मजात होती है|

2.इन्होंने बच्चे के दिमाग़ में एक काल्पनिक मैन्युअल डिवाइस के होने की भी बात कहीं है, जो शब्द - शब्द सजों कर रखता है |

3.इन्होंने इस डिवाइस का नाम LAD (language acquisition device )अर्थात भाषा अधिग्रहण यंत्र रखा |

4.इनका मानना था कि प्रत्येक बच्चे के मस्तिष्क में आनुवंशिक रूप से व्याकरण का एक जन्मजात साँचा अवस्थित रहता है, जो शब्द और अर्थ के संचय में सहायक होता है | जिसे इन्होंने universal grammar सर्वभौंमिक व्याकरण  नाम दिया |

5. इन्होंने अपने सिद्धांत को और अधिक स्पष्ट करतें हुएँ भाषा के दो लेवल बताये
सरफेस लेवल
डीप लेवल
सरफेस लेवल से तात्पर्य बच्चे की उस अवस्था से है, जिसमे वह केवल शब्द सुनता है और उसको LAD में संचित करके रखता है, जबकि डीप लेवल इसके आगे की स्थिति का नियामक है, इस अवस्था में बच्चा शब्द के साथ - साथ उसके अर्थ को भी समझने लगता है |

6. इन्होंने भाषा को मनोवैज्ञानिक अध्ययन बताते हुएँ, मनोविज्ञान से इसका सम्बन्ध जोड़ा |

7. इन्होंने व्यवहारवादिता की देन की जगह भाषा को जन्मजात माना |

इस तरह इन्होंने भाषायी क्षेत्र में अपने सिद्धांत द्वारा भाषा के एक नए कारक को उजागर किया तथा साथ हीं साथ देश और विदेश में प्रचलित सभी भाषाओं के लिए इनबॉर्न थ्योरी का प्रतिपादन किया | 

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