वर्तमान परिदृश्य में मानसिक स्वास्थ्य
आज पूरी दुनिया विश्वव्यापी संकट कोरोना वायरस से जूझ रही है, स्थिति भयावह है और हालात बदतर| दिन प्रतिदिन आंकड़े डराने वाले सामने आ रहे हैं| ऐसे में लोगों के बीच भय का माहौल है, आम जनता इस वायरस से चिंतित है
वे इसे खतरे के रूप में देख रही हैं और जल्द से जल्द इससे निजात पाना चाहती हैं |लेकिन यह अभी पूर्णतः संभव नहीं है,भारत की हीं हम बात करें तो देखते हैं कि यंहा कोरोनावायरस से मौत के आंकड़े दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं तथा साथ ही साथ संक्रमित होने वालों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है |बढ़ते आंकड़े लोगों के मन में भय पैदा कर रहे हैं, लोग डर और खौफ में जी रहे हैं, वें खुद को लाचार और बेबस मान रहे हैं और धीरे-धीरे एक तरह से मानसिक तनाव के शिकार होते जा रहे हैं | उनके इस मानसिक तनाव को और अधिक बढ़ाने का काम अगर किसी ने किया है तो वह हैं - भारतीय मीडिया | आज हम न्यूज़ चैनल या अखबार के पन्नो को पलट कर देखें तो केवल और केवल एक ही समाचार,एक ही मुद्दा, एक ही विषय दिखाई पड़ता है- कोरोना वायरस |
मोटे मोटे अक्षरों में समाचार पत्र वाले छापते हैं -कोरोनावायरस का प्रकोप, मरने वालों की संख्या में इजाफा,
पिछली बार का रिकॉर्ड टूटा संक्रमण दर में भारत पहले पायदान पर
अस्पताल प्रशासन की लापरवाही ऑक्सीजन की कमी से इतने लोगों की मौत
वेंटीलेटर की खराबी के कारण मरने वालों की संख्या में वृद्धि दिल्ली के अमुक अस्पताल में सैकड़ो की तादाद में लोग मरे |
कहने का तात्पर्य यह है कि यह नकारात्मक खबरें लोगों के मन मस्तिष्क में नकारात्मक भाव पैदा कर रही है, वे तनाव के शिकार हो रहे हैं, और इसी तनाव में वें घुट घुट कर मर रहे हैं| परिणाम यह हो रहा है कि वायरस से अधिक लोगो को वायरस का डर मार रहा है| और यह डर इस हद तक उन पर काबिज हो जा रहा है कि कई लोग तो आत्महत्या जैसे भयावह कदम तक उठा ले रहे हैं| क्योंकि उनके मन मस्तिष्क में यह बात बैठ चुकी है कि इस वायरस का कोई इलाज नहीं है और इससे बच पाना असंभव है| दरअसल,ऐसे लोग वायरस फोबिया से पीड़ित हो गए हैं,वास्तव में ये हुए नहीं है इन्हे बना दिया गया है |
इसका सबसे बड़ा कारण है न्यूज़ चैनलों का एक तरफा दृष्टिकोण जिसमें केवल और केवल नकारात्मक खबरों का ब्यौरा प्रस्तुत किया जा रहा है |
लोगों को यह समझना होगा कि अगर कोरोनावायरस से होने वाली मौतों की संख्या 10 है तो इस वायरस से ठीक होकर अस्पताल से लौटने वालों की संख्या लगभग 100 है अर्थात रिकवरी रेट अधिक है| यह वायरस इतना भी खतरनाक नहीं है जितना इसे दिखाया जा रहा है यदि हम सावधान और सतर्क रहें तो इससे बच सकते हैं,और इसके फैलते हुए चैन को तोड़ इससे निजात भी पा सकते हैं| बस हमें थोड़ी सी सावधानी बरतनी है मास्क और सैनेटाइजर का प्रयोग करते रहना है, भीड़भाड़ वाली जगहों से दूर रहते हुए खुद को सुरक्षित रखना है, और सबसे जरूरी बात सकारात्मक भाव से खुद को परिपूर्ण रखना है |साथ ही 2 गज की दूरी का पालन भी करना है तभी हम अपने आप को और अपनों को बचा सकेंगे |
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