नई शिक्षा नीति

संस्कृत में एक श्लोक है 'विद्या परम बलम' अर्थात विद्या सबसे महत्वपूर्ण बल है| अतः यह सभी के लिए आवश्यक हो जाती है |ऐसे में देश और समाज में शिक्षा के महत्व को स्थापित करना जितना आवश्यक है उतना ही आवश्यक व्यावहारिक शिक्षा प्रदान करना भी है 1986 कि शिक्षा नीति महत्वपूर्ण तो है लेकिन बदलते युग और परिवेश में वह फिट नहीं हो पा रही है इसके कारण छात्र-छात्राओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है |आज आवश्यकता है परिवर्तन की |अतः इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए भारत सरकार ने पुरानी शिक्षा नीति में परिवर्तन करते हुए नई शिक्षा नीति लाने का फैसला किया है जो उक्त अपेक्षाओं को पूर्ण कर सके|

 इस नीति में देश के स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा में परिवर्तन की अपेक्षा की गई है| इस शिक्षा नीति को लागू करने के लिए सरकार ने 2030 तक का लक्ष्य तय किया है... इसकी प्रमुख विशेषताएं कुछ यूँ हैं _

 1- 5+3+3+4  की शिक्षा नीति अर्थात बच्चो की शिक्षा तीसरे वर्ष से प्रारम्भ हों जाएगी और वर्ष 18 तक चलेगी यानि राइट टू एजुकेशन का विस्तार 14 की जगह  18 वर्ष तक हों जायेगा |

2-बच्चो को व्यवहारिक शिक्षा दें उन्हें  जीवनानूपयोगी विषयो से परिचित कराया जायेगा, ताकि वें भविष्य में बेहतर कल का निर्माण कर सकें |

3- कक्षा पाँचवी तक थ्री लैंग्वेज फार्मूला लागु कर मातृभाषा के साथ साथ क्षेत्रीय भाषा को भी समान महत्व दिया जायेगा| उच्च स्तरीय शिक्षा में भाषागत कोई दबाव ना होगा, हाँ प्राचीनकालीन भाषाओं ( संस्कृत आदि )का विकल्प उनके लिए अवश्य होगा | 

4-को - करिकुलर एक्टिविटी को पाठ्यक्रम का हिस्सा बना बच्चो का समग्र विकास किया जायेगा |

5- विद्यालयों में व्यायाम, योग और मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग दें छात्र - छात्राओं को शारीरिक रूप से भी ह्रष्ट - पुष्ट किया जायेगा |

6- शिक्षको की नियुक्ति में पारदर्शी प्रक्रिया का पालन होगा और समय- समय पर उनका आंकलन किया जायेगा |

7- नई शिक्षा नीति के तहत एम. फिल को समाप्त कर दिया जायेगा |

8-डिजिटल शिक्षा तथा विकलांग बच्चो के लिए अलग तरह की शिक्षा का भी प्रावधान इस शिक्षा नीति में हैं |



आशा हैं, नयी शिक्षा नीति की ये विशिष्टताएं भारतीय शिक्षा को वह ऊंचाई प्रदान करा पायेगी जो पूर्ववर्ती नीतियाँ ना करा पायी |


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